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दुर्गा सप्तशती 6.7

अध्याय 6, श्लोक 7

अध्याय 6: Dhūmralocana Vadhaधूम्रलोचनवध

चेत्प्रीत्याद्य भवती मद्भर्तारमुपैष्यति ततो बलान्नयाम्येष केशाकर्षणविह्वलाम्

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लिप्यंतरण

na cetprītyādya bhavatī madbhartāramupaiṣyati tato balānnayāmyeṣa keśākarṣaṇavihvalām

अर्थ

यदि तुम आज प्रेमपूर्वक मेरे स्वामी के पास नहीं चलोगी, तो मैं तुम्हें केश पकड़कर घसीटते हुए बलपूर्वक ले चलूँगा।'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 6.7 का अर्थ क्या है?
यदि तुम आज प्रेमपूर्वक मेरे स्वामी के पास नहीं चलोगी, तो मैं तुम्हें केश पकड़कर घसीटते हुए बलपूर्वक ले चलूँगा।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 6 (Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचन वध) का 7वाँ श्लोक है।