अध्याय 6, श्लोक 17
अध्याय 6: Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचनवधचुकोप दैत्याधिपतिः शुम्भः प्रस्फुरिताधरः । आज्ञापयामास च तौ चण्डमुण्डौ महासुरौ ॥
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लिप्यंतरण
cukopa daityādhipatiḥ śumbhaḥ prasphuritādharaḥ ājñāpayāmāsa ca tau caṇḍamuṇḍau mahāsurau
अर्थ
तब दैत्याधिपति शुम्भ अधर फड़काता हुआ क्रोधित हो उठा, और उसने चण्ड व मुण्ड नामक दो महान् असुरों को आज्ञा दी:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 6.17 का अर्थ क्या है?▼
तब दैत्याधिपति शुम्भ अधर फड़काता हुआ क्रोधित हो उठा, और उसने चण्ड व मुण्ड नामक दो महान् असुरों को आज्ञा दी:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 6 (Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचन वध) का 17वाँ श्लोक है।