अध्याय 6, श्लोक 14
अध्याय 6: Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचनवधविच्छिन्नबाहुशिरसः कृतास्तेन तथापरे । पपौ च रुधिरं कोष्ठादन्येषां धुतकेसरः ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
vicchinnabāhuśirasaḥ kṛtāstena tathāpare papau ca rudhiraṃ koṣṭhādanyeṣāṃ dhutakesaraḥ
अर्थ
उसने औरों को भुजा और सिर से रहित कर दिया; और अयाल झटकते हुए दूसरों के पेट से रक्त पी लिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 6.14 का अर्थ क्या है?▼
उसने औरों को भुजा और सिर से रहित कर दिया; और अयाल झटकते हुए दूसरों के पेट से रक्त पी लिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 6 (Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचन वध) का 14वाँ श्लोक है।