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दुर्गा सप्तशती 6.12

अध्याय 6, श्लोक 12

अध्याय 6: Dhūmralocana Vadhaधूम्रलोचनवध

कांश्चित्करप्रहारेण दैत्यानास्येन चापरान् आक्रान्त्या चाधरेणान्यान् जघान महासुरान्

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लिप्यंतरण

kāṃścitkaraprahāreṇa daityānāsyena cāparān ākrāntyā cādhareṇānyān jaghāna sa mahāsurān

अर्थ

किन्हीं महान् असुरों को उसने पंजे के प्रहार से, किन्हीं को मुख से, और किन्हीं अन्य को (शरीर से) दबाकर मार डाला।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 6.12 का अर्थ क्या है?
किन्हीं महान् असुरों को उसने पंजे के प्रहार से, किन्हीं को मुख से, और किन्हीं अन्य को (शरीर से) दबाकर मार डाला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 6 (Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचन वध) का 12वाँ श्लोक है।