अध्याय 3, श्लोक 5
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधसच्छिन्नधन्वा विरथो हताश्वो हतसारथिः । अभ्यधावत तां देवीं खड्गचर्मधरोऽसुरः ॥
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लिप्यंतरण
sacchinnadhanvā viratho hatāśvo hatasārathiḥ abhyadhāvata tāṃ devīṃ khaḍgacarmadharo'suraḥ
अर्थ
धनुष टूट जाने, रथ नष्ट हो जाने, घोड़े और सारथि मारे जाने पर वह असुर खड्ग और ढाल लेकर देवी पर झपटा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.5 का अर्थ क्या है?▼
धनुष टूट जाने, रथ नष्ट हो जाने, घोड़े और सारथि मारे जाने पर वह असुर खड्ग और ढाल लेकर देवी पर झपटा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 5वाँ श्लोक है।