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दुर्गा सप्तशती 3.6

अध्याय 3, श्लोक 6

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

सिंहमाहत्य खड्गेन तीक्ष्णधारेण मूर्धनि आजघान भुजे सव्ये देवीमप्यतिवेगवान्

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लिप्यंतरण

siṃhamāhatya khaḍgena tīkṣṇadhāreṇa mūrdhani ājaghāna bhuje savye devīmapyativegavān

अर्थ

अत्यंत वेगवान् उस असुर ने तीखी धार वाले खड्ग से सिंह के मस्तक पर प्रहार किया और देवी की बाईं भुजा पर भी वार किया।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.6 का अर्थ क्या है?
अत्यंत वेगवान् उस असुर ने तीखी धार वाले खड्ग से सिंह के मस्तक पर प्रहार किया और देवी की बाईं भुजा पर भी वार किया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 6वाँ श्लोक है।