अध्याय 3, श्लोक 4
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधचिच्छेद च धनुः सद्यो ध्वजं चातिसमुच्छृतम् । विव्याध चैव गात्रेषु छिन्नधन्वानमाशुगैः ॥
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लिप्यंतरण
ciccheda ca dhanuḥ sadyo dhvajaṃ cātisamucchṛtam vivyādha caiva gātreṣu chinnadhanvānamāśugaiḥ
अर्थ
उन्होंने तुरंत उसका धनुष और अत्यंत ऊँची ध्वजा काट डाली, और धनुष कट जाने पर उसके अंगों को अपने तीव्र बाणों से बेध दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.4 का अर्थ क्या है?▼
उन्होंने तुरंत उसका धनुष और अत्यंत ऊँची ध्वजा काट डाली, और धनुष कट जाने पर उसके अंगों को अपने तीव्र बाणों से बेध दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 4वाँ श्लोक है।