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दुर्गा सप्तशती 3.3

अध्याय 3, श्लोक 3

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

तस्य छित्वा ततो देवी लीलयैव शरोत्करान् जघान तुरगान्बाणैर्यन्तारं चैव वाजिनाम्

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लिप्यंतरण

tasya chitvā tato devī līlayaiva śarotkarān jaghāna turagānbāṇairyantāraṃ caiva vājinām

अर्थ

तब देवी ने उसके बाण-समूहों को मानो खेल-खेल में ही काटकर, अपने बाणों से उसके घोड़ों और सारथि को भी मार डाला।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.3 का अर्थ क्या है?
तब देवी ने उसके बाण-समूहों को मानो खेल-खेल में ही काटकर, अपने बाणों से उसके घोड़ों और सारथि को भी मार डाला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 3वाँ श्लोक है।