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दुर्गा सप्तशती 3.2

अध्याय 3, श्लोक 2

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

देवीं शरवर्षेण ववर्ष समरेऽसुरः यथा मेरुगिरेः श‍ृङ्गं तोयवर्षेण तोयदः

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लिप्यंतरण

sa devīṃ śaravarṣeṇa vavarṣa samare'suraḥ yathā merugireḥ śa‍ṛṅgaṃ toyavarṣeṇa toyadaḥ

अर्थ

उस असुर ने युद्ध में देवी पर बाणों की वर्षा की, जैसे मेघ मेरु पर्वत के शिखर पर जलवृष्टि करता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.2 का अर्थ क्या है?
उस असुर ने युद्ध में देवी पर बाणों की वर्षा की, जैसे मेघ मेरु पर्वत के शिखर पर जलवृष्टि करता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 2वाँ श्लोक है।