अध्याय 3, श्लोक 1
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधॐ ऋषिरुवाच निहन्यमानं तत्सैन्यमवलोक्य महासुरः । सेनानीश्चिक्षुरः कोपाद्ययौ योद्धुमथाम्बिकाम् ॥
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लिप्यंतरण
oṃ ṛṣiruvāca nihanyamānaṃ tatsainyamavalokya mahāsuraḥ senānīścikṣuraḥ kopādyayau yoddhumathāmbikām
अर्थ
(ॐ। ऋषि बोले —) अपनी सेना का संहार होते देख सेनापति चिक्षुर नामक महान् असुर क्रोध से अम्बिका से युद्ध करने के लिए आगे बढ़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.1 का अर्थ क्या है?▼
(ॐ। ऋषि बोले —) अपनी सेना का संहार होते देख सेनापति चिक्षुर नामक महान् असुर क्रोध से अम्बिका से युद्ध करने के लिए आगे बढ़ा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 1वाँ श्लोक है।