अध्याय 2, श्लोक 68
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधदेव्या गणैश्च तैस्तत्र कृतं युद्धं तथासुरैः । यथैषां तुतुषुर्देवाः पुष्पवृष्टिमुचो दिवि ॥
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लिप्यंतरण
devyā gaṇaiśca taistatra kṛtaṃ yuddhaṃ tathāsuraiḥ yathaiṣāṃ tutuṣurdevāḥ puṣpavṛṣṭimuco divi
अर्थ
देवी के गणों और असुरों द्वारा वहाँ ऐसा युद्ध किया गया कि आकाश से पुष्पवृष्टि करते हुए देवता उन पर अत्यंत प्रसन्न हुए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.68 का अर्थ क्या है?▼
देवी के गणों और असुरों द्वारा वहाँ ऐसा युद्ध किया गया कि आकाश से पुष्पवृष्टि करते हुए देवता उन पर अत्यंत प्रसन्न हुए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 68वाँ श्लोक है।