अध्याय 3, श्लोक 40
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधततो हाहाकृतं सर्वं दैत्यसैन्यं ननाश तत् । प्रहर्षं च परं जग्मुः सकला देवतागणाः ॥
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लिप्यंतरण
tato hāhākṛtaṃ sarvaṃ daityasainyaṃ nanāśa tat praharṣaṃ ca paraṃ jagmuḥ sakalā devatāgaṇāḥ
अर्थ
तब 'हाहाकार' करता हुआ वह सम्पूर्ण दैत्य-सैन्य नष्ट हो गया; और समस्त देवगण परम हर्ष को प्राप्त हुए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.40 का अर्थ क्या है?▼
तब 'हाहाकार' करता हुआ वह सम्पूर्ण दैत्य-सैन्य नष्ट हो गया; और समस्त देवगण परम हर्ष को प्राप्त हुए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 40वाँ श्लोक है।