अध्याय 3, श्लोक 38
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधततः सोऽपि पदाक्रान्तस्तया निजमुखात्तदा । अर्धनिष्क्रान्त एवासीद्देव्या वीर्येण संवृतः ॥
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लिप्यंतरण
tataḥ so'pi padākrāntastayā nijamukhāttadā ardhaniṣkrānta evāsīddevyā vīryeṇa saṃvṛtaḥ
अर्थ
तब देवी के चरण से दबा हुआ वह अपने (भैंसे के) मुख से आधा ही बाहर निकल पाया था कि देवी के पराक्रम से पूरी तरह घिर गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.38 का अर्थ क्या है?▼
तब देवी के चरण से दबा हुआ वह अपने (भैंसे के) मुख से आधा ही बाहर निकल पाया था कि देवी के पराक्रम से पूरी तरह घिर गया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 38वाँ श्लोक है।