अध्याय 3, श्लोक 37
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधऋषिरुवाच एवमुक्त्वा समुत्पत्य सारूढा तं महासुरम् । पादेनाक्रम्य कण्ठे च शूलेनैनमताडयत् ॥
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लिप्यंतरण
ṛṣiruvāca evamuktvā samutpatya sārūḍhā taṃ mahāsuram pādenākramya kaṇṭhe ca śūlenainamatāḍayat
अर्थ
(ऋषि बोले —) ऐसा कहकर देवी ने उछलकर उस महान् असुर पर चढ़कर, अपने चरण से उसका कण्ठ दबाकर उसे त्रिशूल से मारा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.37 का अर्थ क्या है?▼
(ऋषि बोले —) ऐसा कहकर देवी ने उछलकर उस महान् असुर पर चढ़कर, अपने चरण से उसका कण्ठ दबाकर उसे त्रिशूल से मारा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 37वाँ श्लोक है।