अध्याय 3, श्लोक 36
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधदेव्युवाच गर्ज गर्ज क्षणं मूढ मधु यावत्पिबाम्यहम् । मया त्वयि हतेऽत्रैव गर्जिष्यन्त्याशु देवताः ॥
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लिप्यंतरण
devyuvāca garja garja kṣaṇaṃ mūḍha madhu yāvatpibāmyaham mayā tvayi hate'traiva garjiṣyantyāśu devatāḥ
अर्थ
(देवी बोलीं —) 'अरे मूढ़! क्षण भर गरज ले, गरज ले, जब तक मैं यह मधु पी रही हूँ। जब मैं तुझे यहीं मार डालूँगी, तब शीघ्र ही देवता गरजेंगे।'
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.36 का अर्थ क्या है?▼
(देवी बोलीं —) 'अरे मूढ़! क्षण भर गरज ले, गरज ले, जब तक मैं यह मधु पी रही हूँ। जब मैं तुझे यहीं मार डालूँगी, तब शीघ्र ही देवता गरजेंगे।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 36वाँ श्लोक है।