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दुर्गा सप्तशती 3.35

अध्याय 3, श्लोक 35

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

सा तान्प्रहितांस्तेन चूर्णयन्ती शरोत्करैः उवाच तं मदोद्धूतमुखरागाकुलाक्षरम्

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लिप्यंतरण

sā ca tānprahitāṃstena cūrṇayantī śarotkaraiḥ uvāca taṃ madoddhūtamukharāgākulākṣaram

अर्थ

और उसके फेंके हुए उन पर्वतों को बाण-समूहों से चूर्ण करती हुई देवी ने, मद से तमतमाए मुख और लड़खड़ाते स्वर में, उससे कहा —

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.35 का अर्थ क्या है?
और उसके फेंके हुए उन पर्वतों को बाण-समूहों से चूर्ण करती हुई देवी ने, मद से तमतमाए मुख और लड़खड़ाते स्वर में, उससे कहा —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 35वाँ श्लोक है।