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दुर्गा सप्तशती 3.34

अध्याय 3, श्लोक 34

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

ननर्द चासुरः सोऽपि बलवीर्यमदोद्धतः विषाणाभ्यां चिक्षेप चण्डिकां प्रति भूधरान्

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लिप्यंतरण

nanarda cāsuraḥ so'pi balavīryamadoddhataḥ viṣāṇābhyāṃ ca cikṣepa caṇḍikāṃ prati bhūdharān

अर्थ

और वह असुर भी बल-वीर्य के मद से उन्मत्त होकर गरजा, और अपने सींगों से चण्डिका पर पर्वत फेंकने लगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.34 का अर्थ क्या है?
और वह असुर भी बल-वीर्य के मद से उन्मत्त होकर गरजा, और अपने सींगों से चण्डिका पर पर्वत फेंकने लगा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 34वाँ श्लोक है।