Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 3.33

अध्याय 3, श्लोक 33

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

ततः क्रुद्धा जगन्माता चण्डिका पानमुत्तमम् पपौ पुनः पुनश्चैव जहासारुणलोचना

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

tataḥ kruddhā jaganmātā caṇḍikā pānamuttamam papau punaḥ punaścaiva jahāsāruṇalocanā

अर्थ

इस पर जगन्माता चण्डिका ने क्रुद्ध होकर बार-बार उत्तम मधु (पेय) पिया और लाल नेत्र किए हँसने लगीं।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.33 का अर्थ क्या है?
इस पर जगन्माता चण्डिका ने क्रुद्ध होकर बार-बार उत्तम मधु (पेय) पिया और लाल नेत्र किए हँसने लगीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 33वाँ श्लोक है।