Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 3.32

अध्याय 3, श्लोक 32

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

ततो महासुरो भूयो माहिषं वपुरास्थितः तथैव क्षोभयामास त्रैलोक्यं सचराचरम्

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

tato mahāsuro bhūyo māhiṣaṃ vapurāsthitaḥ tathaiva kṣobhayāmāsa trailokyaṃ sacarācaram

अर्थ

तब उस महान् असुर ने पुनः भैंसे का शरीर धारण कर लिया और पहले की भाँति समस्त चराचर त्रैलोक्य को क्षुब्ध कर दिया।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.32 का अर्थ क्या है?
तब उस महान् असुर ने पुनः भैंसे का शरीर धारण कर लिया और पहले की भाँति समस्त चराचर त्रैलोक्य को क्षुब्ध कर दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 32वाँ श्लोक है।