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दुर्गा सप्तशती 3.31

अध्याय 3, श्लोक 31

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

करेण महासिंहं तं चकर्ष जगर्ज कर्षतस्तु करं देवी खड्गेन निरकृन्तत

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लिप्यंतरण

kareṇa ca mahāsiṃhaṃ taṃ cakarṣa jagarja ca karṣatastu karaṃ devī khaḍgena nirakṛntata

अर्थ

उसने सूँड़ से देवी के महासिंह को खींचा और गरजा; पर खींचते समय देवी ने खड्ग से उसकी सूँड़ काट डाली।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.31 का अर्थ क्या है?
उसने सूँड़ से देवी के महासिंह को खींचा और गरजा; पर खींचते समय देवी ने खड्ग से उसकी सूँड़ काट डाली।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 31वाँ श्लोक है।