अध्याय 3, श्लोक 30
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधतत एवाशु पुरुषं देवी चिच्छेद सायकैः । तं खड्गचर्मणा सार्धं ततः सोऽभून्महागजः ॥
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लिप्यंतरण
tata evāśu puruṣaṃ devī ciccheda sāyakaiḥ taṃ khaḍgacarmaṇā sārdhaṃ tataḥ so'bhūnmahāgajaḥ
अर्थ
देवी ने तुरंत उस पुरुष को ढाल-तलवार सहित अपने बाणों से बेध डाला; तब वह एक विशाल हाथी बन गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.30 का अर्थ क्या है?▼
देवी ने तुरंत उस पुरुष को ढाल-तलवार सहित अपने बाणों से बेध डाला; तब वह एक विशाल हाथी बन गया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 30वाँ श्लोक है।