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दुर्गा सप्तशती 3.29

अध्याय 3, श्लोक 29

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

ततः सिंहोऽभवत्सद्यो यावत्तस्याम्बिका शिरः छिनत्ति तावत् पुरुषः खड्गपाणिरदृश्यत

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लिप्यंतरण

tataḥ siṃho'bhavatsadyo yāvattasyāmbikā śiraḥ chinatti tāvat puruṣaḥ khaḍgapāṇiradṛśyata

अर्थ

तब वह तत्काल सिंह बन गया; और ज्यों ही अम्बिका उसका सिर काटने को हुईं, त्यों ही वह हाथ में खड्ग लिए पुरुष के रूप में दिखाई दिया।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.29 का अर्थ क्या है?
तब वह तत्काल सिंह बन गया; और ज्यों ही अम्बिका उसका सिर काटने को हुईं, त्यों ही वह हाथ में खड्ग लिए पुरुष के रूप में दिखाई दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 29वाँ श्लोक है।