अध्याय 3, श्लोक 28
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधसा क्षिप्त्वा तस्य वै पाशं तं बबन्ध महासुरम् । तत्याज माहिषं रूपं सोऽपि बद्धो महामृधे ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
sā kṣiptvā tasya vai pāśaṃ taṃ babandha mahāsuram tatyāja māhiṣaṃ rūpaṃ so'pi baddho mahāmṛdhe
अर्थ
उन्होंने उस पर पाश फेंककर उस महान् असुर को बाँध लिया; महासंग्राम में बँध जाने पर उसने भैंसे का रूप त्याग दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.28 का अर्थ क्या है?▼
उन्होंने उस पर पाश फेंककर उस महान् असुर को बाँध लिया; महासंग्राम में बँध जाने पर उसने भैंसे का रूप त्याग दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 28वाँ श्लोक है।