अध्याय 3, श्लोक 27
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधइति क्रोधसमाध्मातमापतन्तं महासुरम् । दृष्ट्वा सा चण्डिका कोपं तद्वधाय तदाकरोत् ॥
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लिप्यंतरण
iti krodhasamādhmātamāpatantaṃ mahāsuram dṛṣṭvā sā caṇḍikā kopaṃ tadvadhāya tadākarot
अर्थ
इस प्रकार क्रोध से उन्मत्त होकर आते हुए उस महान् असुर को देखकर चण्डिका ने उसके वध के लिए क्रोध किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.27 का अर्थ क्या है?▼
इस प्रकार क्रोध से उन्मत्त होकर आते हुए उस महान् असुर को देखकर चण्डिका ने उसके वध के लिए क्रोध किया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 27वाँ श्लोक है।