अध्याय 3, श्लोक 26
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधधुतशृङ्गविभिन्नाश्च खण्डं खण्डं ययुर्घनाः । श्वासानिलास्ताः शतशो निपेतुर्नभसोऽचलाः ॥
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लिप्यंतरण
dhutaśaṛṅgavibhinnāśca khaṇḍaṃ khaṇḍaṃ yayurghanāḥ śvāsānilāstāḥ śataśo nipeturnabhaso'calāḥ
अर्थ
उसके हिलते सींगों से विदीर्ण मेघ टुकड़े-टुकड़े हो गए; और उसके श्वास की वायु से सैकड़ों पर्वत आकाश से गिरने लगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.26 का अर्थ क्या है?▼
उसके हिलते सींगों से विदीर्ण मेघ टुकड़े-टुकड़े हो गए; और उसके श्वास की वायु से सैकड़ों पर्वत आकाश से गिरने लगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 26वाँ श्लोक है।