अध्याय 3, श्लोक 25
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधवेगभ्रमणविक्षुण्णा मही तस्य व्यशीर्यत । लाङ्गूलेनाहतश्चाब्धिः प्लावयामास सर्वतः ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
vegabhramaṇavikṣuṇṇā mahī tasya vyaśīryata lāṅgūlenāhataścābdhiḥ plāvayāmāsa sarvataḥ
अर्थ
उसके वेगपूर्वक चक्कर काटने से कुचली हुई पृथ्वी फटने लगी; और पूँछ से आहत समुद्र चारों ओर उमड़ पड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.25 का अर्थ क्या है?▼
उसके वेगपूर्वक चक्कर काटने से कुचली हुई पृथ्वी फटने लगी; और पूँछ से आहत समुद्र चारों ओर उमड़ पड़ा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 25वाँ श्लोक है।