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दुर्गा सप्तशती 3.24

अध्याय 3, श्लोक 24

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

सोऽपि कोपान्महावीर्यः खुरक्षुण्णमहीतलः श‍ृङ्गाभ्यां पर्वतानुच्चांश्चिक्षेप ननाद

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लिप्यंतरण

so'pi kopānmahāvīryaḥ khurakṣuṇṇamahītalaḥ śa‍ṛṅgābhyāṃ parvatānuccāṃścikṣepa ca nanāda ca

अर्थ

वह महापराक्रमी भी क्रोध से खुरों से धरती को रौंदता हुआ, अपने सींगों से ऊँचे पर्वतों को फेंकने और गरजने लगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.24 का अर्थ क्या है?
वह महापराक्रमी भी क्रोध से खुरों से धरती को रौंदता हुआ, अपने सींगों से ऊँचे पर्वतों को फेंकने और गरजने लगा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 24वाँ श्लोक है।