अध्याय 3, श्लोक 23
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधनिपात्य प्रमथानीकमभ्यधावत सोऽसुरः । सिंहं हन्तुं महादेव्याः कोपं चक्रे ततोऽम्बिका ॥
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लिप्यंतरण
nipātya pramathānīkamabhyadhāvata so'suraḥ siṃhaṃ hantuṃ mahādevyāḥ kopaṃ cakre tato'mbikā
अर्थ
देवी के गण-समूह (प्रमथों) को गिराकर वह असुर महादेवी के सिंह को मारने दौड़ा; तब अम्बिका क्रोधित हो उठीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.23 का अर्थ क्या है?▼
देवी के गण-समूह (प्रमथों) को गिराकर वह असुर महादेवी के सिंह को मारने दौड़ा; तब अम्बिका क्रोधित हो उठीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 23वाँ श्लोक है।