अध्याय 3, श्लोक 20
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधएवं सङ्क्षीयमाणे तु स्वसैन्ये महिषासुरः । माहिषेण स्वरूपेण त्रासयामास तान् गणान् ॥
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लिप्यंतरण
evaṃ saṅkṣīyamāṇe tu svasainye mahiṣāsuraḥ māhiṣeṇa svarūpeṇa trāsayāmāsa tān gaṇān
अर्थ
इस प्रकार अपनी सेना का संहार होते देख महिषासुर ने भैंसे के अपने रूप से देवी के गणों को भयभीत कर दिया —
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.20 का अर्थ क्या है?▼
इस प्रकार अपनी सेना का संहार होते देख महिषासुर ने भैंसे के अपने रूप से देवी के गणों को भयभीत कर दिया —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 20वाँ श्लोक है।