अध्याय 3, श्लोक 18
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधउग्रास्यमुग्रवीर्यं च तथैव च महाहनुम् । त्रिनेत्रा च त्रिशूलेन जघान परमेश्वरी ॥
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लिप्यंतरण
ugrāsyamugravīryaṃ ca tathaiva ca mahāhanum trinetrā ca triśūlena jaghāna parameśvarī
अर्थ
त्रिनेत्रा परमेश्वरी ने त्रिशूल से उग्रास्य, उग्रवीर्य और इसी प्रकार महाहनु का वध किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.18 का अर्थ क्या है?▼
त्रिनेत्रा परमेश्वरी ने त्रिशूल से उग्रास्य, उग्रवीर्य और इसी प्रकार महाहनु का वध किया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 18वाँ श्लोक है।