अध्याय 3, श्लोक 17
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधदेवी क्रुद्धा गदापातैश्चूर्णयामास चोद्धतम् । बाष्कलं भिन्दिपालेन बाणैस्ताम्रं तथान्धकम् ॥
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लिप्यंतरण
devī kruddhā gadāpātaiścūrṇayāmāsa coddhatam bāṣkalaṃ bhindipālena bāṇaistāmraṃ tathāndhakam
अर्थ
क्रुद्ध देवी ने उद्धत नामक असुर को गदा के प्रहारों से चूर्ण कर दिया, बाष्कल को भिन्दिपाल से, तथा ताम्र और अंधक को बाणों से (मार डाला)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.17 का अर्थ क्या है?▼
क्रुद्ध देवी ने उद्धत नामक असुर को गदा के प्रहारों से चूर्ण कर दिया, बाष्कल को भिन्दिपाल से, तथा ताम्र और अंधक को बाणों से (मार डाला)।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 17वाँ श्लोक है।