अध्याय 3, श्लोक 16
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधउदग्रश्च रणे देव्या शिलावृक्षादिभिर्हतः । दन्तमुष्टितलैश्चैव करालश्च निपातितः ॥
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लिप्यंतरण
udagraśca raṇe devyā śilāvṛkṣādibhirhataḥ dantamuṣṭitalaiścaiva karālaśca nipātitaḥ
अर्थ
और उदग्र देवी द्वारा रणभूमि में शिला, वृक्ष आदि से मारा गया; तथा कराल भी दाँतों, मुक्कों और हथेलियों से धराशायी कर दिया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.16 का अर्थ क्या है?▼
और उदग्र देवी द्वारा रणभूमि में शिला, वृक्ष आदि से मारा गया; तथा कराल भी दाँतों, मुक्कों और हथेलियों से धराशायी कर दिया गया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 16वाँ श्लोक है।