अध्याय 3, श्लोक 15
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधततो वेगात् खमुत्पत्य निपत्य च मृगारिणा । करप्रहारेण शिरश्चामरस्य पृथक् कृतम् ॥
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लिप्यंतरण
tato vegāt khamutpatya nipatya ca mṛgāriṇā karaprahāreṇa śiraścāmarasya pṛthak kṛtam
अर्थ
तब सिंह ने वेग से आकाश में उछलकर और नीचे गिरकर पंजे के प्रहार से चामर का सिर धड़ से अलग कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.15 का अर्थ क्या है?▼
तब सिंह ने वेग से आकाश में उछलकर और नीचे गिरकर पंजे के प्रहार से चामर का सिर धड़ से अलग कर दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 15वाँ श्लोक है।