अध्याय 2, श्लोक 9
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधततोऽतिकोपपूर्णस्य चक्रिणो वदनात्ततः । निश्चक्राम महत्तेजो ब्रह्मणः शङ्करस्य च ॥
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लिप्यंतरण
tato'tikopapūrṇasya cakriṇo vadanāttataḥ niścakrāma mahattejo brahmaṇaḥ śaṅkarasya ca
अर्थ
तब अत्यंत क्रोध से भरे चक्रधारी विष्णु के मुख से एक महान् तेज निकला, और वैसे ही ब्रह्मा तथा शंकर के मुख से भी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.9 का अर्थ क्या है?▼
तब अत्यंत क्रोध से भरे चक्रधारी विष्णु के मुख से एक महान् तेज निकला, और वैसे ही ब्रह्मा तथा शंकर के मुख से भी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 9वाँ श्लोक है।