अध्याय 2, श्लोक 10
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधअन्येषां चैव देवानां शक्रादीनां शरीरतः । निर्गतं सुमहत्तेजस्तच्चैक्यं समगच्छत ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
anyeṣāṃ caiva devānāṃ śakrādīnāṃ śarīrataḥ nirgataṃ sumahattejastaccaikyaṃ samagacchata
अर्थ
इन्द्र (शक्र) आदि अन्य देवताओं के शरीर से भी अत्यंत महान् तेज निकला; और वह सब एक हो गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.10 का अर्थ क्या है?▼
इन्द्र (शक्र) आदि अन्य देवताओं के शरीर से भी अत्यंत महान् तेज निकला; और वह सब एक हो गया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 10वाँ श्लोक है।