अध्याय 2, श्लोक 11
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधअतीव तेजसः कूटं ज्वलन्तमिव पर्वतम् । ददृशुस्ते सुरास्तत्र ज्वालाव्याप्तदिगन्तरम् ॥
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लिप्यंतरण
atīva tejasaḥ kūṭaṃ jvalantamiva parvatam dadṛśuste surāstatra jvālāvyāptadigantaram
अर्थ
देवताओं ने वहाँ अत्यंत तेज की एक राशि देखी, जो जलते हुए पर्वत के समान थी और जिसकी ज्वालाओं से दिशाएँ व्याप्त थीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.11 का अर्थ क्या है?▼
देवताओं ने वहाँ अत्यंत तेज की एक राशि देखी, जो जलते हुए पर्वत के समान थी और जिसकी ज्वालाओं से दिशाएँ व्याप्त थीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 11वाँ श्लोक है।