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दुर्गा सप्तशती 2.8

अध्याय 2, श्लोक 8

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

इत्थं निशम्य देवानां वचांसि मधुसूदनः चकार कोपं शम्भुश्च भ्रुकुटीकुटिलाननौ

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लिप्यंतरण

itthaṃ niśamya devānāṃ vacāṃsi madhusūdanaḥ cakāra kopaṃ śambhuśca bhrukuṭīkuṭilānanau

अर्थ

देवताओं के ये वचन सुनकर मधुसूदन (विष्णु) क्रोधित हुए, और शम्भु (शिव) भी — दोनों के मुख भौंहों की कुटिलता से तन गए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.8 का अर्थ क्या है?
देवताओं के ये वचन सुनकर मधुसूदन (विष्णु) क्रोधित हुए, और शम्भु (शिव) भी — दोनों के मुख भौंहों की कुटिलता से तन गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 8वाँ श्लोक है।