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दुर्गा सप्तशती 2.7

अध्याय 2, श्लोक 7

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

एतद्वः कथितं सर्वममरारिविचेष्टितम् शरणं वः प्रपन्नाः स्मो वधस्तस्य विचिन्त्यताम्

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लिप्यंतरण

etadvaḥ kathitaṃ sarvamamarāriviceṣṭitam śaraṇaṃ vaḥ prapannāḥ smo vadhastasya vicintyatām

अर्थ

देवताओं के इस शत्रु का सारा कृत्य आपको कह सुनाया; हम आपकी शरण में आए हैं — उसके वध का उपाय सोचा जाए।'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.7 का अर्थ क्या है?
देवताओं के इस शत्रु का सारा कृत्य आपको कह सुनाया; हम आपकी शरण में आए हैं — उसके वध का उपाय सोचा जाए।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 7वाँ श्लोक है।