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दुर्गा सप्तशती 2.6

अध्याय 2, श्लोक 6

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

स्वर्गान्निराकृताः सर्वे तेन देवगणा भुवि विचरन्ति यथा मर्त्या महिषेण दुरात्मना

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लिप्यंतरण

svargānnirākṛtāḥ sarve tena devagaṇā bhuvi vicaranti yathā martyā mahiṣeṇa durātmanā

अर्थ

उस दुरात्मा महिष द्वारा स्वर्ग से निकाले गए समस्त देवगण मर्त्यों के समान पृथ्वी पर भटक रहे हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.6 का अर्थ क्या है?
उस दुरात्मा महिष द्वारा स्वर्ग से निकाले गए समस्त देवगण मर्त्यों के समान पृथ्वी पर भटक रहे हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 6वाँ श्लोक है।