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दुर्गा सप्तशती 2.5

अध्याय 2, श्लोक 5

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

सूर्येन्द्राग्न्यनिलेन्दूनां यमस्य वरुणस्य अन्येषां चाधिकारान्स स्वयमेवाधितिष्ठति

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लिप्यंतरण

sūryendrāgnyanilendūnāṃ yamasya varuṇasya ca anyeṣāṃ cādhikārānsa svayamevādhitiṣṭhati

अर्थ

'वह स्वयं ही सूर्य, इन्द्र, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, यम, वरुण तथा अन्य देवताओं के अधिकारों को धारण कर रहा है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.5 का अर्थ क्या है?
'वह स्वयं ही सूर्य, इन्द्र, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, यम, वरुण तथा अन्य देवताओं के अधिकारों को धारण कर रहा है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 5वाँ श्लोक है।