अध्याय 2, श्लोक 66
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधक्षणेन तन्महासैन्यमसुराणां तथाम्बिका । निन्ये क्षयं यथा वह्निस्तृणदारुमहाचयम् ॥
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लिप्यंतरण
kṣaṇena tanmahāsainyamasurāṇāṃ tathāmbikā ninye kṣayaṃ yathā vahnistṛṇadārumahācayam
अर्थ
क्षण भर में अम्बिका ने असुरों की उस महासेना को वैसे ही नष्ट कर दिया जैसे अग्नि तृण और काठ के विशाल ढेर को।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.66 का अर्थ क्या है?▼
क्षण भर में अम्बिका ने असुरों की उस महासेना को वैसे ही नष्ट कर दिया जैसे अग्नि तृण और काठ के विशाल ढेर को।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 66वाँ श्लोक है।