अध्याय 2, श्लोक 65
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधशोणितौघा महानद्यः सद्यस्तत्र प्रसुस्रुवुः । मध्ये चासुरसैन्यस्य वारणासुरवाजिनाम् ॥
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लिप्यंतरण
śoṇitaughā mahānadyaḥ sadyastatra prasusruvuḥ madhye cāsurasainyasya vāraṇāsuravājinām
अर्थ
वहाँ तत्काल रक्त की धाराओं की महानदियाँ बह निकलीं, असुर-सेना तथा हाथियों, असुरों व घोड़ों के बीच।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.65 का अर्थ क्या है?▼
वहाँ तत्काल रक्त की धाराओं की महानदियाँ बह निकलीं, असुर-सेना तथा हाथियों, असुरों व घोड़ों के बीच।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 65वाँ श्लोक है।