अध्याय 2, श्लोक 64
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधपातितै रथनागाश्वैरसुरैश्च वसुन्धरा । अगम्या साभवत्तत्र यत्राभूत् स महारणः ॥
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लिप्यंतरण
pātitai rathanāgāśvairasuraiśca vasundharā agamyā sābhavattatra yatrābhūt sa mahāraṇaḥ
अर्थ
गिरे हुए रथों, हाथियों, घोड़ों और असुरों से वह भूमि, जहाँ वह महायुद्ध हुआ, अगम्य हो गई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.64 का अर्थ क्या है?▼
गिरे हुए रथों, हाथियों, घोड़ों और असुरों से वह भूमि, जहाँ वह महायुद्ध हुआ, अगम्य हो गई।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 64वाँ श्लोक है।