अध्याय 2, श्लोक 63
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधकबन्धाश्छिन्नशिरसः खड्गशक्त्यृष्टिपाणयः । तिष्ठ तिष्ठेति भाषन्तो देवीमन्ये महासुराः ॥
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लिप्यंतरण
kabandhāśchinnaśirasaḥ khaḍgaśaktyṛṣṭipāṇayaḥ tiṣṭha tiṣṭheti bhāṣanto devīmanye mahāsurāḥ
अर्थ
कटे सिर वाले कबन्ध, हाथों में खड्ग, शक्ति व ऋष्टि लिए, तथा अन्य महान् असुर देवी से 'ठहर, ठहर' कहते रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.63 का अर्थ क्या है?▼
कटे सिर वाले कबन्ध, हाथों में खड्ग, शक्ति व ऋष्टि लिए, तथा अन्य महान् असुर देवी से 'ठहर, ठहर' कहते रहे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 63वाँ श्लोक है।