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दुर्गा सप्तशती 2.61

अध्याय 2, श्लोक 61

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

एकबाह्वक्षिचरणाः केचिद्देव्या द्विधाकृताः छिन्नेऽपि चान्ये शिरसि पतिताः पुनरुत्थिताः

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लिप्यंतरण

ekabāhvakṣicaraṇāḥ keciddevyā dvidhākṛtāḥ chinne'pi cānye śirasi patitāḥ punarutthitāḥ

अर्थ

कुछ को देवी ने एक भुजा, एक नेत्र और एक चरण वाला रहने पर भी दो टुकड़े कर दिया; और कुछ अन्य सिर कटने पर भी गिरकर पुनः उठ खड़े हुए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.61 का अर्थ क्या है?
कुछ को देवी ने एक भुजा, एक नेत्र और एक चरण वाला रहने पर भी दो टुकड़े कर दिया; और कुछ अन्य सिर कटने पर भी गिरकर पुनः उठ खड़े हुए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 61वाँ श्लोक है।