अध्याय 2, श्लोक 58
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधकेचिन्निपतिता भूमौ भिन्नाः शूलेन वक्षसि । निरन्तराः शरौघेण कृताः केचिद्रणाजिरे ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
kecinnipatitā bhūmau bhinnāḥ śūlena vakṣasi nirantarāḥ śaraugheṇa kṛtāḥ kecidraṇājire
अर्थ
कुछ अन्य शूल से वक्षःस्थल में बिंधकर भूमि पर गिर पड़े; और कुछ रणभूमि में बाणों की झड़ी से छलनी कर दिए गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.58 का अर्थ क्या है?▼
कुछ अन्य शूल से वक्षःस्थल में बिंधकर भूमि पर गिर पड़े; और कुछ रणभूमि में बाणों की झड़ी से छलनी कर दिए गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 58वाँ श्लोक है।