अध्याय 2, श्लोक 57
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधविपोथिता निपातेन गदया भुवि शेरते । वेमुश्च केचिद्रुधिरं मुसलेन भृशं हताः ॥
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लिप्यंतरण
vipothitā nipātena gadayā bhuvi śerate vemuśca kecidrudhiraṃ musalena bhṛśaṃ hatāḥ
अर्थ
गदा के प्रहार से कुचलकर भूमि पर पड़ गए; और कुछ मूसल से अत्यंत आहत होकर रक्त वमन करने लगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.57 का अर्थ क्या है?▼
गदा के प्रहार से कुचलकर भूमि पर पड़ गए; और कुछ मूसल से अत्यंत आहत होकर रक्त वमन करने लगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 57वाँ श्लोक है।