अध्याय 2, श्लोक 56
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधअसुरान् भुवि पाशेन बद्ध्वा चान्यानकर्षयत् । केचिद् द्विधाकृतास्तीक्ष्णैः खड्गपातैस्तथापरे ॥
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लिप्यंतरण
asurān bhuvi pāśena baddhvā cānyānakarṣayat kecid dvidhākṛtāstīkṣṇaiḥ khaḍgapātaistathāpare
अर्थ
और कुछ अन्य असुरों को पाश से बाँधकर भूमि पर घसीट लिया। कुछ तीखे खड्ग-प्रहारों से दो टुकड़े कर दिए गए, और कुछ अन्य,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.56 का अर्थ क्या है?▼
और कुछ अन्य असुरों को पाश से बाँधकर भूमि पर घसीट लिया। कुछ तीखे खड्ग-प्रहारों से दो टुकड़े कर दिए गए, और कुछ अन्य,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 56वाँ श्लोक है।