अध्याय 2, श्लोक 55
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधखड्गादिभिश्च शतशो निजघान महासुरान् । पातयामास चैवान्यान् घण्टास्वनविमोहितान् ॥
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लिप्यंतरण
khaḍgādibhiśca śataśo nijaghāna mahāsurān pātayāmāsa caivānyān ghaṇṭāsvanavimohitān
अर्थ
तथा खड्ग आदि से सैकड़ों महान् असुरों को मार डाला, और घण्टे के नाद से मोहित अन्य असुरों को धराशायी कर दिया;
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.55 का अर्थ क्या है?▼
तथा खड्ग आदि से सैकड़ों महान् असुरों को मार डाला, और घण्टे के नाद से मोहित अन्य असुरों को धराशायी कर दिया;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 55वाँ श्लोक है।