अध्याय 2, श्लोक 54
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधमृदङ्गांश्च तथैवान्ये तस्मिन् युद्धमहोत्सवे । ततो देवी त्रिशूलेन गदया शक्तिवृष्टिभिः ॥
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लिप्यंतरण
mṛdaṅgāṃśca tathaivānye tasmin yuddhamahotsave tato devī triśūlena gadayā śaktivṛṣṭibhiḥ
अर्थ
और कुछ अन्य ने उस युद्ध-महोत्सव में मृदंग बजाए। तब देवी ने त्रिशूल, गदा और शक्तियों की वर्षा से,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.54 का अर्थ क्या है?▼
और कुछ अन्य ने उस युद्ध-महोत्सव में मृदंग बजाए। तब देवी ने त्रिशूल, गदा और शक्तियों की वर्षा से,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 54वाँ श्लोक है।